Sunday, July 14, 2019

सपने बिकते हैं

सपने बिकते हैं
सौदागर हैं यहाँ
सभी,
आपके सपनों के
जैसे ही वे कहते हैं
आपके के सपने सिर्फ आपके नही
बना लेते हैं.....बही
आपके सपनों की
और फिर शुरू होता है सिलसिला
ब्याज पर ब्याज लगाने का
साहूकार की तरह
आपके सपने आपको ही बेचते हैं
और आप फँस चुके होते हो
सुनहले भविष्य के मकड़जाल में
अफ़सोस
 सपने आपके होते हैं
पर सौदागर कोई और
वसूलता है वह कीमत आपके सपनों की
जितने हसीन सपने उतनी बड़ी कीमत
सपने बिकते हैं
सिर्फ आपके नही होने का झाँसा देकर
होती है तिज़ारत
लगती है निष्ठुर लुभावनी कीमत
आपको लगता है आप
सपने पुरे कर रहे हो
वास्तव में तभी आप रख रहे होते हो
अपने सपनों को
गिरवी...…